भारतीय राजनीति, और मुसलमानों के साथ विश्वासघात
भारतीय राजनीति, और मुसलमानों के साथ विश्वासघात
देश की आज़ादी के बाद से देश में हज़ारों राजनीतिक पार्टियां बनी, और तमाम राजनीतिक पार्टियों ने लोगों को ये आश्वाशन दिलाया, की वह उनके हितों की बात करेंगी, लेकिन जितनी भी राजनीतिक पार्टियां बनी सबने मुसलमानों का अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया, और उनको सिर्फ वोट बैंक बना कर रखा, भाजपा का डर दिखा कर उनका वोट हासिल किया, और अब भी कर रही हैं, भारत का मुसलमान जो आज़ादी के समय शिक्षा के मामले में सबसे आगे था, आज वो शिक्षा में सबसे पिछड़ा है, इसके लिए कहीं न कहीं खुद को मुसलमानो की पार्टियां बताने वाली तमाम सेक्युलर पार्टियां भी ज़िम्मेदार हैं, 60 सालों तक देश में कांग्रेस पार्टी की सरकार रही है, देश के तमाम समाजों को जिस तरह से कांग्रेस पार्टी ने स्वास्थ और शिक्षा के मामले में आगे किया, अच्छा होता कि अगर इसी तरह कांग्रेस पार्टी मुस्लिम समाज के स्वास्थ और शिक्षा पर ज़ोर देती, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम समाज के विकास पर कभी ज़ोर नहीं दिया,देश में तमाम खुद को सेक्युलर कहने वाली पार्टियां हैं, “INC, SP, BSP, RJD, JDU, ASP, NCP, TMC, CPM, AGP, BJD, AAP, JMM, RLD, YSRCP” ऐसी ही और अन्य पार्टियां हैं जो चुनाव लड़ती हैं, लेकिन उनके चुनाव लड़ने से किसी भी सेक्युलर दल को कोई दिक्कत नहीं होती है,
जैसे ही भारत का कोई मुसलमान अगर अपनी राजनीतिक पार्टी बनाना चाहता है, और ये कहता है कि वह अपनी पार्टी से पूरे देश या प्रदेश में अपने उम्मीदवार उतारेगा तो यही खुद को सेक्युलर कहने वाली तमाम पार्टियां उसका विरोध करती हैं, और उसके लिए भजपा का “एजेंट” और भाजपा की 'B' टीम जैसे शब्द का इस्तेमाल करती हैं, अगर मुस्लिम समाज चाहता है कि उसके वह अधिकार जिनसे उनको वंचित रखा गया है, उसको वह फिर से हासिल हों, तो इसके लिए मुस्लिम समाज को अब अपनी राजनीति वहीं से शुरू करनी होगी, जहां से बाबा साहेब डॉ आंबेडकर ने दलितों की राजनीति शुरू की थी, बाबा साहेब ने दलितों से जो कहा था कि, अगर तुम चाहते हो कि तुम्हे तुम्हारे सभी अधिकार प्राप्त हों, तो इसके लिए तुम्हे शिक्षा प्राप्त करनी होगी, किसी हद तक दलित समाज बाबा साहेब आंबेडकर की इस बात के महत्त्व को समझ चुका है, और अगर मुस्लिम समाज भी चाहता है तो उसको भी शिक्षा के महत्त्व को समझना होगा, क्यूंकि हम सबके नबी मुहम्मद (स•अ•व•) ने भी शिक्षा प्राप्त करने पर बहुत ज़ोर दिया, क्यूंकि शिक्षा ही किसी भी क़ौम और समाज के विकास की पहचान होती है, अब अगर मुसलमान चाहते हैं, कि उनके वह अधिकार जिनसे उनको वंचित रखा गया है, उनको दुबारा हासिल हों, तो इसके लिए मुस्लिम समाज को अब राजनीति में आना होगा, और अपने हक़ और अधिकारों के लिए लड़ना होगा, क्यूंकि जो क़ौम या समाज अपने हक़ और अधिकारों की लड़ाई नहीं लड़ता है , उसको घर बैठ कर कभी भी वह अधिकार नहीं मिलते हैं।
लेखक : इमरान गाज़ी
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