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Showing posts from September, 2020

शिक्षा और मुसलमान

  ज्ञान किसी भी देश और धर्म के विकास का उत्तरदायी होता है। मुस्लिम सबसे पिछड़े हैं, खासकर जब शिक्षा की बात आती है। जबकि इस्लाम में ज्ञान प्राप्त करने पर बहुत ज़ोर दिया गया है। इस्लामी विचारक अल्लामा इकबाल की कविता का उत्पाद भी मुसलमानों के लिए ज्ञान और शिक्षा के महत्व पर आधारित है। इसके बावजूद, दुनिया भर में शिक्षा के मामले में मुसलमान अभी भी पीछे हैं। बिहार में मुसलमानों की बड़ी संख्या के बावजूद, शिक्षा के क्षेत्र में उनकी भागीदारी नहीं है। वैसे भारत में साक्षरता का मतलब केवल अपना नाम लिखना-पढ़ना होता है। विकसित देशों में साक्षरता का पैमाना ऊंचा होता है। हमारे यहां साक्षर और शिक्षित के बीच बहुत ज्यादा फासला होता है। तमाम राजनीतिक दलों में बड़े-बड़े पदों पर मुसलमान नेता हैं। चुनाव के दौरान पार्टियां इन मुस्लिम चेहरों को मुसलमानों को लुभाने के लिए आगे कर देती हैं। धार्मिक नेताओं की तरह इनके एजेंडे में भी आधुनिक शिक्षा नहीं है। दलितों से बाबा साहेब अंबेडकर ने एक ही बात कही थी शिक्षित बनो। दलितों के नेताओं ने कुछ हद तक शिक्षा का महत्व समझा, लेकिन मुसलमानों के नेता आज भी शिक्षा का महत्...

मुसलमानों का शिकार

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         भारतीय मुसलमानों का शिकार एक बार एक शिकारी जंगल से एक तीतर को पकड़ कर लाता है, और उसे अपने घर में एक अलग पिंजरे में रखता है, और उसे काजू, किशमिश और बादाम खिलाता है।  जब तीतर बड़ा हो जाता है, तो वह उसे पिंजरे के साथ जंगल में ले जाता है, वहां एक जाल बिछाता है, और पिंजरे में तीतर को रख कर खुद एक झाड़ी के पीछे छिप जाता है,  और तीतर से सीटी बजा कर बोलता है।  "बोल बेटा बोल" अपने मालिक की आवाज़ सुन कर तीतर ज़ोर ज़ोर से चिल्लाता है। उसकी आवाज़ सुन कर जंगल के सभी तीतर (यह सोचकर कि वह अपनी क़ौम में से है और मुसीबत में है चलो उसकी मदद करते हैं) खिंचे चले आते हैं, और शिकारी के जाल में फंस जाते हैं। शिकारी मुस्कुराता हुआ आता है, और पालतू तीतर को अलग  और बाकी तीतरों को अलग झोले में डाल कर घर ले जाता है, फिर अपने पालतू तीतर के सामने एक-एक करके दूसरे तीतरों को काटता है,  लेकिन पालतू तीतर खामोश रहता है!!  यही स्थिति आज के मुसलमानों की है, शिकारियों ने अनगिनत तीतर पाल रखें हैं, जिसकी वजह से मुसलमान इन शिकारियों के जाल में फंस जात...

भारतीय राजनीति, और मुसलमानों के साथ विश्वासघात

भारतीय राजनीति, और मुसलमानों के साथ विश्वासघात देश की आज़ादी के बाद से देश में हज़ारों राजनीतिक पार्टियां बनी, और तमाम राजनीतिक पार्टियों ने लोगों को ये आश्वाशन दिलाया, की वह उनके हितों की बात करेंगी, लेकिन जितनी भी राजनीतिक पार्टियां बनी सबने मुसलमानों का अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया, और उनको सिर्फ वोट बैंक बना कर रखा, भाजपा का डर दिखा कर उनका वोट हासिल किया, और अब भी कर रही हैं, भारत का मुसलमान जो आज़ादी के समय शिक्षा के मामले में सबसे आगे था, आज वो शिक्षा में सबसे पिछड़ा है, इसके लिए कहीं न कहीं खुद को मुसलमानो की पार्टियां बताने वाली तमाम सेक्युलर पार्टियां भी ज़िम्मेदार हैं, 60 सालों तक देश में कांग्रेस पार्टी की सरकार रही है, देश के तमाम समाजों को जिस तरह से कांग्रेस पार्टी ने स्वास्थ और शिक्षा के मामले में आगे किया, अच्छा होता कि अगर इसी तरह कांग्रेस पार्टी मुस्लिम समाज के स्वास्थ और शिक्षा पर ज़ोर देती, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम समाज के विकास पर कभी ज़ोर नहीं दिया,देश में तमाम खुद को  सेक्युलर कहने वाली पार्टियां हैं, “INC, SP, BSP, RJD, JDU, ASP, NCP, TMC, CPM,...